UN में गरजे पेज़ेश्कियन: बोले—’ईरान ने कभी सिर नहीं झुकाया’

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों और पाबंदियों के बावजूद ईरान ने कभी घुटने नहीं टेके हैं और वह गाज़ा के साथ मजबूती से खड़ा है।
‘हम दबाव के आगे कभी नहीं झुके’
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से भाषण देते हुए कहा कि ईरान का इतिहास गवाह है कि उसने कभी किसी महाशक्ति के आगे सिर नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि उनके देश पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए गए और आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन ईरान ने अपनी स्वतंत्रता और आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया।
गाज़ा और फ़िलिस्तीन को पूरा समर्थन
अपने संबोधन में पेज़ेश्कियन ने गाज़ा की मौजूदा स्थिति और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों का प्रमुखता से ज़िक्र किया।
- प्रतिरोध का संकल्प: उन्होंने कहा कि ईरान और गाज़ा के लोग ‘प्रतिरोध’ (Resistance) के रास्ते पर कायम हैं।
- इज़राइल पर हमला: ईरानी राष्ट्रपति ने इज़राइल पर गाज़ा में बेकसूर लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि गाज़ा के लोग अपनी ज़मीन और हक के लिए मजबूती से लड़ रहे हैं।
पश्चिमी देशों और अमेरिका को कड़ा संदेश
पेज़ेश्कियन ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य पूर्व (Middle East) में शांति सिर्फ बातचीत और बराबरी के आधार पर ही आ सकती है, दबाव और धमकियों से नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान किसी भी देश से दुश्मनी नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करना अच्छे से जानता है।
क्षेत्रीय शांति और कूटनीति की पेशकश
कड़े रुख के साथ-साथ ईरानी राष्ट्रपति ने यह संदेश भी दिया कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते यह बातचीत बराबरी के स्तर पर हो और ईरान पर लगे बेबुनियाद प्रतिबंधों को हटाया जाए।
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में ईरानी राष्ट्रपति के भाषण और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है।



